राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान, सहारनपुर द्वारा बच्चों के लिये एक ई- पत्रिका

Sunday, May 12, 2013


पौधे भी करते हैं बातें

साउथ अफ्रीकी बॉटनिस्ट ल्याल वॉटसन ने जब 1973 में आई अपनी किताब 'सुपर नेचर' में पौधों में इमोशंस होने की बात कही थी तो साइंटिस्ट्स ने उन्हें दरकिनार करते हुए इसे नॉनसेंस करार दिया था।
वॉटसन का कहना था कि प्लांट्स के इमोशंस लाई डिटेक्टर में रजिस्टर किए जा सकते हैं। पर अब उनके इस दावे से एक कदम आगे बढ़ते हुए यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया (यूडब्लूए) ने कहा है कि पौधे आवाज आने पर रिएक्ट भी करते हैं और एक दूसरे से बात करने के लिए शोर भी करते हैं।
यूडब्लूए की पोस्ट डॉक्टोरल रिसर्च फेलो मोनिका गैगलियानो ने ब्रिटेन की यूनिवसिर्टी ऑफ ब्रिस्टल और इटली की फ्लोरेंस यूनिवर्सिटीटी के अपने साथियों के साथ मिलकर यह कर दिखाया है कि छोटे पौधों की जड़ें आवाज निकालती हैं और आवाज आने पर रिएक्ट भी करती हैं।
गैगलियानो ने कहा कि हर कोई जानता है कि पौधे रोशनी से रिएक्ट करते हैं और साइंटिस्ट्स यह भी जानते हैं कि पौधे आपसी कम्यूनिकेशन के लिए केमिकल का इस्तेमाल करते हैं। खासकर ऐसा तब होता है जब पौधों को खाने वाला कोई जीव पास आ रहा होता है।

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